Monday, January 5, 2026

प्रेम को अपनी संपूर्णता के साथ प्रस्तुत करता संग्रह : बारिश बाजा बजाती है

 


कविता कवि की संवेदनाओं की बारिश है। नेह-बारिश, फ़िक्र-बारिश, उम्मीद-बारिश। और कविता के शब्द उस बारिश की बूँदें, बारिश के बाद की मिट्टी की महक उस कविता की भाव-हिलोरें। बारिश आसमान का धरती के प्रति प्रेम है। और प्रेम इस सृष्टि का आधार तत्व। जब तक प्रेम है, कवि इस सृष्टि पर भाव-बारिश करता रहेगा, या कहें कि जब तक कवि है, सृष्टि पर प्रेम-बारिश होती रहेगी।

केवल एक व्यक्ति के अस्तित्व से आरम्भ होकर समूची सृष्टि के अस्तित्व तक एकाकार हो जाना; प्रेम की सर्वोच्च अवस्था है। कवि शहंशाह आलम के प्रेम कविताओं के संग्रह बारिश बाजा बजाती है में यही सर्वोच्च अवस्था का प्रेम हमारे सामने अपनी संपूर्णता के साथ प्रस्तुत होता है। जयपुर के प्रतिष्ठित वेरा प्रकाशन से वर्ष 2025 में आये इस संग्रह में उनकी कुल 72 कविताएँ सम्मिलित हैं।

जैसा कि ऊपर उल्लेख हुआ कि यह प्रेम कविताओं का संग्रह है। लेकिन यह प्रेम रूमानी अथवा व्यक्तिगत प्रेम होकर भी सामाजिक-सार्वभौमिक सन्दर्भ लिए हुए अधिक है। इस प्रेम में प्रेमिका है, उसके संग बीते बेशकीमती लम्हे हैं, उसके साथ की अनमोल यादें हैं, प्रेम का इज़हार है लेकिन इसी के साथ उन्हीं सब लम्हों, उन्हीं सब यादों के आसपास देश-समाज और प्रकृति भी अपनी पूरी धमक के साथ उपस्थित हैं। और यहीं यह संग्रह विशिष्ट बन पड़ता है।

संग्रह में अभिव्यक्त एक जोड़े का प्रेम पूरी शालीनता से प्रकट होता प्रेम है। कहीं प्रेम के नाम पर हो-हल्ला नहीं। कोई दिखावा या उच्छृंखलता नहीं। पूरी पाकीज़गी के साथ एक गाढ़े प्रेम की सघन अनुभूति है। इन कविताओं में अभिव्यक्त प्रेम स्मृतियों के माध्यम से अधिक प्रकट होता है। यहाँ प्रेम पारंपरिक क्रियाकलापों तथा आलम्बनों पर भी आश्रित नहीं है। केवल प्रेम है, उस हर एक वस्तु से जुड़ा हुआ, जो जीवन से सरोकार रखती है-

छत पर लगी सौंफ
तुम्हारी देह की सुगंध लेकर
फैलती-पसरती रही है ब्रह्माण्ड में
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तुम्हारे लिए
तेजपत्ते पर लिखता हूँ
ढाई अक्षर वाला प्रेम

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इस पृथ्वीतल पर
बहुत कम बच रहा है प्रेम
बचा सको तो सच में बचा लो
विलुप्त हो रही प्रेम की चिट्ठियों को

कवि के इस विराट प्रेम में प्रकृति के तमाम घटक मौजूद हैं। आकाश, धरती, मिट्टी, पेड़, पक्षी, नदियाँ, बादल, झरने, पहाड़, चाँद- मनुष्य के वे तमाम साथी, जो सृष्टि के आरम्भ से उसके साथ रहे हैं, कवि के प्रेम का हिस्सा हैं, उसकी फ़िक्र का हिस्सा हैं। कवि अपने इन समस्त साथियों की उपस्थिति से अपने परिवेश के बढ़े सौंदर्य पर अभिभूत भी होता है, उनके होने से पृथ्वी एवं मानवता के हुए उपकार के प्रति कृतज्ञ भी होता है तथा उनके स्वरूप के विकृत होने से उपजते संकट के प्रति चिंतित-भयभीत भी रहता है।

चिड़ियां उड़ती हुई आती हैं असंख्य
बैठ जाती हैं बुआई में लगे बैलों की पीठ पर
उनसे बात करती हैं अपने शब्दों, अपने वाक्यों में
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गुप्तचर बनकर आकाश
बारिश में नहा रहे बच्चों को
देखता है साधुता से
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जिस तरह से
प्रेम के शत्रु असंख्य हैं
दरख़्त के, पहाड़ के, दरिया के
शत्रु भी असंख्य हैं फैले हुए

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जब एक पहाड़ को
हम पैदा नहीं कर सकते
तब क्यूँ रोज़ काट रहे हैं
तब क्यूँ रोज़ मार रहे हैं
उसको अपना सबसे बड़ा शत्रु मानकर!

पुस्तक की इन कविताओं में दो प्रेमियों के अलावा एक तीसरा प्रमुख पात्र है- 'कवि का राजा'। यह राजा एक तानाशाह है। प्रेम से भयभीत तानाशाह। मनुष्यता तथा सद्भाव का शत्रु तानाशाह। इस राजा तथा इसके राज की स्थितियों-परिस्थितियों से एक ऐसी तस्वीर उभरती है, जो प्रेम तथा मनुष्यता के लिए भयावह है। इन परिस्थितियों तथा राजा का चित्रण एक प्रेम कविताओं के संग्रह में भी उसके समकाल की विकटता का अंकन है।

मैं था कि दिल से जीना चाहता था
अपने प्रेम करने वाले समय को

मेरे राजा को जबकि चिढ़ थी
मेरे प्रेम करने वाले समय से
__________

यह उचाट समय
गहरे, बहुत गहरे जाकर मारता है मुझे
और उस हत्यारे को लग रहा है
कि जीवित हूँ मैं अब भी

और ऐसे समय, ऐसे माहौल में प्रेम को जीता, प्रेम को लिखता कवि वह सब भी रचता है, जो मनुष्यता के बचे रहने, उम्मीदों के बचे रहने की संभावनाएँ पैदा करता है-

मैं एक ऐसा गीत लिखता हूँ
जिस गीत को गाकर तुम सब
समय के अँधेरे को पार कर सकोगे
__________

मैं हर उस अक्षर को
घिस-पिट कर मिटाता रहता हूँ
जिस अक्षर में प्रेम से
शत्रुता की बू आती है

पुस्तक 'बारिश बाजा बजाती है' पठनीय कविताओं का एक उल्लेखनीय संग्रह है, जो प्रेम के साथ-साथ आपसी सद्भाव एवं प्रकृति के संरक्षण के प्रति हमें सचेत करता है। अपने समय का साहसिक चित्रांकन इस संग्रह एक का और प्रमुख बिंदु है। 'उनका मिज़ाज', 'पूर्णता', 'खुदाई', एवं 'पृथ्वी का लंगर हैं पहाड़' शीर्षक कविताओं ने मेरे पाठक मन को बहुत प्रभावित किया। रचनाकार का यह 11वां कविता संग्रह है। यह संख्या अपने आप में परिपक्वता का प्रमाण है, जैसा इस संग्रह की कविताओं के विषय में कहा जा सकता है। इन उत्कृष्ट प्रेम कविताओं के संग्रह के लिए शहंशाह आलम जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।




समीक्ष्य पुस्तक- बारिश बाजा बजाती है
विधा- कविता
रचनाकार- शहंशाह आलम
प्रकाशक- वेरा प्रकाशन, जयपुर
मूल्य- 150 रुपये

1 comment:

  1. शुक्रिया किताबें बोलती हैं 🌹
    शहंशाह आलम

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